नई दिल्ली: MEA passport statement विदेश मंत्रालय (MEA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार (24 जून) को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारतीय पासपोर्ट को मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि नागरिकता के पक्के सबूत के तौर पर. इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छिड़ गई है.
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रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारी ने कहा कि पासपोर्ट कई तरह की जांच-पड़ताल और दस्तावेजों की बारीकी से जांच के बाद जारी किया जाता है, लेकिन इसका मुख्य मकसद अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना और विदेश में पासपोर्ट रखने वाले की नागरिकता साबित करना है.
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, हालांकि पासपोर्ट कई सरकारी एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही दिया जाता है, लेकिन कानून की नजर में यह नागरिकता का प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि यात्रा का एक दस्तावेज है. देश भर में पासपोर्ट सेवाओं के विस्तार पर जोर देते हुए विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवाओं को आधुनिक बनाने की सरकार की कोशिशों का जिक्र किया, जिसमें चिप-आधारित ई-पासपोर्ट की शुरुआत भी शामिल है.
इस बीच, इस बयान ने कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है, एक बहस छेड़ दी है कि भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है. कानूनी विशेषज्ञों और सरकारी रिकॉर्ड से पता चलता है कि जन्म से नागरिकता पाने वाले लोगों के लिए भारत में नागरिकता का कोई एक ही यूनिवर्सल दस्तावेज नहीं है. आधार, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड जैसे दस्तावेज खास कामों के लिए तो इस्तेमाल होते हैं, लेकिन वे अपने आप में नागरिकता का पक्का सबूत नहीं हैं.
इस साफ-सफाई पर नेताओं और जानी-मानी हस्तियों ने भी सवाल उठाए. शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन और पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही जारी किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की स्थिति को लेकर भ्रम पैदा होने की संभावना है.
ठाकरे ने सवाल किया, ‘अगर विदेश मंत्रालय (MEA) का मानना है कि पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज नहीं है, तो: 1) पासपोर्ट देने से पहले पुलिस क्या वेरिफ़ाई करती है? 2) क्या हमारा देश गैर-भारतीयों को भी यात्रा दस्तावेज के तौर पर पासपोर्ट देता है? 3) क्या इस घोषणा से दूसरे देशों के मन में यह शक पैदा नहीं होगा कि क्या गैर-भारतीयों को भी यात्रा दस्तावेज के तौर पर भारतीय पासपोर्ट मिल सकता है?’
उन्होंने आगे कहा, ‘अपनी बहुत ज़्यादा उलझी हुई विदेश नीति के अलावा, विदेश मंत्रालय और कितना बेतुका हो सकता है?’ पटकथा लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने विदेश मंत्रालय के दावे पर सवाल उठाया और इसे बेतुका बताया. एक्स पर एक पोस्ट में अख्तर ने कहा, ‘विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज है, नागरिकता का सबूत नहीं. सच में??? तो क्या वे कुछ लोगों को यह यात्रा दस्तावेज इसलिए दे रहे हैं क्योंकि उन्हें पूरा यकीन नहीं है कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक है या नहीं?? यह बेतुका है.’
कहा जा रहा है कि विदेश मंत्रालय (MEA) के बयानों में पासपोर्ट एक्ट, 1967 की धारा 20 का जिक्र किया गया है. यह धारा भारत सरकार को किसी ऐसे व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करने की इजाजत देती है जो भारत का नागरिक नहीं है, बशर्ते ऐसा करना जनहित में हो. धारा 20 में कहा गया है, ‘पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी करने से जुड़े पिछले प्रावधानों में कुछ भी लिखा हो, फिर भी केंद्र सरकार किसी ऐसे व्यक्ति को पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है या जारी करवा सकती है जो भारत का नागरिक नहीं है, अगर सरकार की राय में जनहित में ऐसा करना जरूरी हो.’
भारत या विदेश में पासपोर्ट जारी करने से जुड़ी भारत सरकार की गाइडलाइंस में भी कहा गया है कि पासपोर्ट एक पहचान और यात्रा दस्तावेज है और पासपोर्ट एक्ट के तहत भारत सरकार गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है. इससे पहले 19 जून को, सालाना रीजनल पासपोर्ट ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि भारतीय पासपोर्ट राष्ट्रीय पहचान का एक जरिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे सम्मान और भरोसे की नजर से देखा जाता है.
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