3 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षा बंधन का त्योहार, जानिए इसका महत्व डॉ. सुशांत राज आचार्य के साथ

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    राखी बांधने का मुहूर्त : 09:27 मिनट से 21:11 मिनट तक
    देहरादून। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने रक्षाबंधन के संबंध मे जानकारी देते हुये बताया की रक्षाबंधन का त्योहार सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस साल सावन के आखिरी सोमवार 3 अगस्त पर रक्षाबंधन का त्योहार पड़ रहा है। भाई-बहन का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन इस बार बेहद खास होगा, क्योंकि इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान का शुभ संयोग बन रहा है। रक्षाबंधन पर ऐसा शुभ संयोग 29 साल बाद आया है। साथ ही इस साल भद्रा और ग्रहण का साया भी रक्षाबंधन पर नहीं पड़ रहा है।
    रक्षाबंधन का त्योहार इस साल 3 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार हर साल श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है और 3 अगस्त के दिन यह तिथि पड़ रही है। रक्षाबंधन के दिन सुबह-सुबह उठकर स्नान करें और शुद्ध कपड़े पहनें। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट रिश्ते को दर्शाता है। रक्षाबंधन का त्योहार सदियों से चला आ रहा है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक भी है। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधती हैं। हिंदूओं के लिए इस त्योहार का विशेष महत्व होता है।
    इस विधि से बांधें राखी
    रक्षाबंधन के दिन सुबह-सुबह उठकर स्नान करें और शुद्ध कपड़े पहनें। इसके बाद घर को साफ करें और चावल के आटे का चौक पूरकर मिट्टी के छोटे से घड़े की स्थापना करें। चावल, कच्चे सूत का कपड़ा, सरसों, रोली को एकसाथ मिलाएं। फिर पूजा की थाली तैयार कर दीप जलाएं। थाली में मिठाई रखें। इसके बाद भाई को पीढ़े पर बिठाएं। अगर पीढ़ा आम की लकड़ी का बना हो तो सर्वश्रेष्ठ है।
    रक्षा सूत्र बांधते वक्त भाई को पूर्व दिशा की ओर बिठाएं। वहीं भाई को तिलक लगाते समय बहन का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। इसके बाद भाई के माथ पर टीका लगाकर दाहिने हाथ पर रक्षा सूत्र बांधें। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें फिर उसको मिठाई खिलाएं। अगर बहन बड़ी हो तो छोटे भाई को आशीर्वाद दें और छोटी हो तो बड़े भाई को प्रणाम करें।
    रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व
    पौराणिक कथा के अनुसार, राजसूय यज्ञ के समय भगवान कृष्ण को द्रौपदी ने रक्षा सूत्र के रूप में अपने आंचल का टुकड़ा बांधा था। इसी के बाद से बहनों द्वारा भाई को राखी बांधने की परंपरा शुरू हो गई। रक्षाबंधन के दिन ब्राहमणों द्वारा अपने यजमानों को राखी बांधकर उनकी मंगलकामना की जाती है। इस दिन विद्या आरंभ करना भी शुभ माना जाता है।
    रक्षाबंधन मुहूर्त 2020
    राखी बांधने का मुहूर्त- 09:27:30 से 21:11:21 तक।
    रक्षा बंधन अपराह्न मुहूर्त- 13:45:16 से 16:23:16 तक।
    रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त- 19:01:15 से 21:11:21 तक।
    मुहूर्त अवधि : 11 घंटे 43 मिनट।
    प्रदोष काल मुहूर्त- 19:06 से 21:14
    पूर्णिमा तिथि आरंभ – 21:28 (2 अगस्त)
    पूर्णिमा तिथि समाप्त- 21:27 (3 अगस्त)
    3 अगस्त 2020 को राखी बांधने का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त
    राखी बांधने का मुहूर्त :  09:27 मिनट से 21:11 मिनट तक
    अवधि : 11 घंटे 43 मिनट
    शुभ समय
    6:00 से 7:30 तक,
    9:00 से 10:30 तक,
    3:31 से 6:41 तक
    राहुकाल- सुबह 7:30 से 9:00 बजे तक
    (राहुकाल में राखी न बांधें)
    शुभ संयोग : –
    इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान योग के साथ ही सूर्य शनि के समसप्तक योग, सोमवती पूर्णिमा, मकर का चंद्रमा श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग बन रहा है। इसके पहले यह संयोग साल 1991 में बना था। इस संयोग को कृषि क्षेत्र के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
    कैसे सजाएं राखी की थाली-
    राखी की थाली में रेशमी वस्त्र, केसर, सरसों, चावल, चंदन और कलावा रखकर भगवान की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद राखी भगवान शिव की प्रतिमा को अर्पित करें। अब भगवान शिव को अर्पित किया गया धागा या राखी भाइयों की कलाई में बांधे।
    डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने बताया की हर वर्ष सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। हिंदूओं के लिए यह त्योहार बहुत ही महत्व रखता है। रक्षाबंधन का त्योहार बहन और भाई के बीच स्नेह और प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। बहनों को रक्षाबंधन का इंतजार बहुत रहता है। इस वर्ष यह त्योहार 3 अगस्त को मनाया जा रहा है। रक्षाबंधन के त्योहार के पीछे कई पौराणिक कथाएं मिलती है।
    पुराणों के अनुसार एक समय की बात है एक बार देवताओं और अुसरों के बीच युद्ध हो गया था। यह युद्ध कई वर्षों तक चलता रहा। इस युद्ध में असुरों ने देवताओं को परस्त कर दिया था। असुरों ने इंद्र को हराकर तीनों लोकों में अपनी विजय पताका फहरा दिया था। असुरों से हराने के बाद समस्त देवी-देवता सलाह मांगने के लिए देवगुरु बृहस्पति के पास गए। तब बृहस्पति ने मंत्रोच्चारण के साथ रक्षा संकल्प विधान करने की सलाह दी। देवगुरु के निर्देशानुसार सभी देवताओं नें रक्षा विधान का आयोजन किया। यह रक्षा विधान श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर आरंभ किया गया।  रक्षा विधान में सभी देवताओं ने मिलकर एक रक्षा कवच को सिद्ध कर इंद्र की पत्नी इंद्राणी को सौंप दिया और इसे देवराज इंद्र के दाहिने हाथ में बांधने के लिए कहा। इसके बाद इंद्राणी ने देवराज की कलाई में रक्षा कवच सूत्र को बांध दिया। इसकी ताकत से इंद्र ने पुन: असुरों से युद्ध कर उन्हें परास्त कर दिया और अपना खोया हुआ राजपाठ वापस हासिल कर लिया। तभी से हर वर्ष सावन महीने की पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाने लगा। इस बार रक्षाबंधन 3 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन पर भाई अपने बहनों से राखी बंधवाते हैं। इसके बदले में भाई अपनी बहनों को कुछ उपहार भी देते हैं।
    29 साल बाद श्रावण पूर्णिमा पर सावन के अंतिम सोमवार को रक्षाबंधन का पर्व कई शुभ योग व नक्षत्रों के संयोग में 3 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन भाइयों की कलाई पर बहनें राखी बांधकर उनसे रक्षा का वचन लेंगी। इस बार रक्षाबंधन के अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि व दीर्घायु आयुष्मान योग बन रहा है। साथ ही इस बार भद्रा और ग्रहण का भी रक्षाबंधन पर कोई साया नहीं है।
    इस बार रक्षाबंधन के अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान योग के साथ ही सूर्य शनि के समसप्तक योग, प्रीति योग, सोमवती पूर्णिमा, मकर का चंद्रमा श्रवण नक्षत्र उत्तराषाढा नक्षत्र सोमवार को रहेगा। इससे पहले तिथि वार और नक्षत्र का यह संयोग सन्‌ 1991 में बना था। इन संयोगों से कृषि क्षेत्र के लिए विशेष फलदायी योग बन रहा है। रक्षाबंधन से पहले 2 अगस्त को रात्रि 8 बजकर 43 मिनट से 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक भद्रा रहेगी। इसके साथ ही शाम 7 बजकर 49 मिनट से दीर्घायु कारक आयुष्मान योग भी लग जाएगा। रक्षाबंधन का व्रत करने वाले लोगों को सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद वेदोक्त विधि से पित्र तर्पण और ऋषि पूजन भी करना चाहिए। बहनें रेशम आदि का रक्षा कवच बनाकर उसमें सरसों सुवर्णा केशर, चंदन, अक्षत और दूर्वा रखकर रंगीन सूती वस्त्र में बांधकर उस पर कलश की स्थापना करें। इसके बाद विधि पूर्वक पूजन करें। बहन भाई के दाहिनी हाथ में बांध ऐसा करने से वर्ष भर भाई का जीवन सुखी रहेगा। वहीं शास्त्रों में राखी बांधन के लिए अभिजीत मुहूर्त व गोधूलि बेला विशेष बताई गई है। 3 अगस्त की सुबह 10 बजकर 25 मिनट से शुभ अभिजीत मुहूर्त का आरंभ होगा, वहीं शाम को 5ः30 बजे गोधूलि बेला का शुभ मुहूर्त रहेगा। वैसे दिनभर शुभ चौघड़िया मुहूर्त में भी राखी बांधी जा सकती है।

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