Tarique Rahman : BNP के तारिक रहमान ने दो महीने में पलट दिया बांग्लादेश का चुनावी खेल

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Tarique Rahman :  बांग्लादेश में होने वाले चुनाव से पहले वहां की सियासत में एक नए किरदार की एंट्री हुई थी। ये किरदार पिछले 17 साल से देश के बाहर था। 17 साल के वनवास के बाद वापस लौटा ये चेहरा पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और जियाउर रहमान के बेटे तारिक रहमान का था। उन्हें बांग्लादेशी राजनीति का राजकुमार माना जाता है। बांग्लादेश के चुनावी नतीजों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को बहुमत मिलने के साथ ही वह प्रधानमंत्री पद के एक मजबूत दावेदार बन गए हैं। उनकी वतन वापसी के बाद से ही माना जा रहा था कि वर्षों से सत्ता से बाहर रहने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की एक बार फिर सियासत के शीर्ष पर होगी।

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पत्नी-बेटी के साथ देश लौटे रहमान

तारिक रहमान बीते साल दिसंबर में ढाका लौटे, जहां उनकी पार्टी के हजारों समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया था। वह अपनी पत्नी ज़ुबैदा और बेटी जाइमा के साथ ढाका पहुंचे थे। रहमान की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया लंबे समय से बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती थीं। बेटे के बांग्लादेश लौटने के बाद 30 दिसंबर 2025 को उनका निधन हो गया। मां के निधन के बाद तारिक रहमान ने बीएनपी की बागडोर संभाल ली। उनके आने से जमात ए इस्लामी की भी मुश्किलें बढ़ गईं। जो बांग्लादेश को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का सपना देखती है।

कौन है तारिक रहमान?

तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं। उनकी उम्र 60 वर्ष है। उनकी मां 1991 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। उनके पिता बांग्लादेश में सेना प्रमुख और देश के छठे राष्ट्रपित रहे थे। 2008 में रहमान देश छोड़कर लंदन चले गए थे। 2018 से विदेश से ही BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर भूमिका निभा रहे हैं।

इतनी मजबूत राजनीति प्रष्ठभूमि होने के बाद भी रहमान देश छोड़कर क्यों भागे?

खालिदा जिया और अवामी लीग की नेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना एक दूसरे की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही। देश की राजनीति में एक समय पर केवल इन्हीं का राज था। खालिदा जिया के दूसरे कार्यकाल 2001 से 2006 तक रहमान को काफी प्रसिद्धि मिली। इसी के साथ उनकी पार्टी पर भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा के आरोप भी लगे। 2006 से 2009 में बांग्लादेश में सेना के समर्थन वाली कार्यवाहक सरकार आई। इसने बीएनपी पर लगे सभी आरोपों की जांच की। 2007 में उन्हें ढाका स्थित बंगले से गिरफ्तार कर लिया गया था। महीनों बाद उन्हें जमानत मिली और वे इलाज के लिए ब्रिटेन चले गए। इसके बाद वापस नहीं आए।

रहमान की बांग्लादेश में वापसी कैसे हुई?

शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद बीएनपी पर बड़ी कार्रवाई की गई। पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी नेता खालिदा जिया को जेल में बंद कर दिया गया। शेख हसीना के सत्ता में रहते हुए रहमान का वापस आना काफी मुश्किल था, लेकिन 2024 में बांग्लादेश में छात्रों के हिंसक प्रदर्शन शुरू हुए। देखते ही देखते इन प्रदर्शनों ने शेख हसीना के सत्ता से उखाड़ फेंका। शेख हसीना के देश छोड़कर भागना पड़ा। इसके बाद यूनुस को अतंरिम सरकार का प्रमुख बनाया गया। अंतरिम सरकार ने बीएमपी और रहमान पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया। फरवरी 2026 में चुनावों की घोषणा की गई। इसके बाद रहमान का देश में वापसी का रास्ता साफ हो गया।

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