Ramalinga Reddy Resignation: कर्नाटक सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी सामने आई है। उन्हें जल संसाधन विभाग (वाटर रिसोर्सेज) दिए जाने से वे संतुष्ट नहीं हैं और इस मुद्दे पर उन्होंने अपनी असहमति भी जताई है। इसी नाराजगी के बीच अब उन्होंने इस्तीफा भी दे दिया है।
इस्तीफे के बाद क्या बोले रामलिंगा रेड्डी
इस्तीफे के बाद रेड्डी ने साफ किया कि उन्होंने केवल मंत्री पद छोड़ा है, कांग्रेस पार्टी नहीं। उन्होंने आगे कहा, ‘मैं अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम नहीं कर सकता, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं।’ उन्होंने कहा कि वे विधायक बने रहेंगे और कांग्रेस से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वह पिछले 53 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा बरकरार है। उन्होंने कभी किसी से मंत्री पद की मांग नहीं की। उन्होंने याद दिलाया कि वह पूर्व मुख्यमंत्री एम. वीरप्पा मोइली और एस.एम. कृष्णा की सरकारों में भी मंत्री रह चुके हैं और पार्टी ने उन्हें हमेशा जिम्मेदारियां दी हैं। रेड्डी ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों में काम किया है।
दरअसल, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार रात अपने 13 मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन किया। इस दौरान रामलिंगा रेड्डी को जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि रेड्डी बंगलूरू विकास विभाग मिलने की उम्मीद कर रहे थे और इसी विभाग पर उनका दावा था।
सूत्रों के अनुसार, विभागों के आवंटन को लेकर गुरुवार को हुई बैठक के दौरान रेड्डी अपनी नाराजगी जताते हुए बीच में ही बाहर चले गए थे। बैठक में उन्होंने मुख्यमंत्री को वर्ष 2023 में किए गए उस वादे की भी याद दिलाई, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि भविष्य में कैबिनेट फेरबदल होने पर उन्हें बंगलूरू विकास विभाग दिया जाएगा।
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